Saturday, 13 November 2021



बीती हुई बातें, बीते हुए पल
वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और
बहुत से गुजरे हुए कल
अक्सर याद आते हैं!
खो जाना दादी की कहानियों में
और खोये रहना बचपन की नादानियो में
वो दिन अपनी ही मनमानियों के
अक्सर याद आते हैं!
वो स्कूल जाना वो कालेज जाना
और कभी कभी ना जाने के भी बहाने बनाना
घर पर रह कर गुड़ियों से खेलना
अक्सर याद आते हैं !

 

रफ़्तार ज़िन्दगी की है वही की वही
मैं भी खड़ी रही यहीं की यहीं
असमंजस में रह गयी ज़िन्दगी भर मैं तो
जो भी हुआ अब तक वो गलत कि सही...
किसी से सुना था कहीं तो पढ़ा था
कर्मो का फ़ल मिलता है ज़रूर
कहीं जाने की ज़रूरत ही क्या
सब होता है यहीं के यहीं ...
रिश्ते सभी मोह के धागे
सभी बेबस हैं इस बात के आगे
उमर गुजर जाती है इसी सोच में
नाते किसी से तोड़े कि नहीं ...

 

वक़्त चलता रहा, साँसें भी चलती रहीं
यादों के गलियारे चल कर, मैं भी तो थकती नहीं !
उम्र से लम्बी तो नही कोई दास्तां
फिर खत्म क्यु नही होता यादों का कारवां !
अजनबी लोगों को राहों में देख कर ,सोचती हूं कभी कभी
युं ही तो दिखने लगे हैं आजकल अपने सभी !
आता नही समझ- किससे दूर रहू किसे पास रखू
किनको गैरो में रखू किनको खास रखू !
रिश्तो के जाल में उलझ कर फ़सते ही जाते हैं लोग
ये प्यार, ये नफ़रत, ये सब बस लगने लगते हैं रोग !
जीवन के साथ साथ ये रोग चलते हैं
इसी रोग की वजह से हम जीवन भर जलते हैं!

 

थोड़ा एकान्त चाहती हूं मैं ...
जिस घर में बचपन गुजारा ,
फिर से वहां रहना चाहती हूं मैं !
जिन रास्तो से कभी मैं गुजरा करती थी,
उन पर से ही-फिर से- गुजरना चाहती हूं मैं!
वो गुजरे हुए पल, जो आयेंगे नही वापस ,
अतीत में जाकर थोड़ी देर के लिए उन्हे जीना चाहती हूं मैं!
पुराने मकानो में जाकर ,कुछ पुरानी यादें ,
जीवन भर के लिए संजोना चाहती हूं मैं !
थोड़ी देर के लिए ही सही ,
बीते हुए कल में खोना चाहती हूं मैं!
बस...इसलिए ही थोडा सा एकान्त चाहती हूं मैं!

 

फ़ासले कभी दूर ना हो सके ,
जो दर्मियान तेरे मेरे थे !
कोशिश तो बहुत की लेकिन
जाने क्यु -तुम तक जाने के राह बहुत ही टेढे मेढे थे !
एक उलझन तुम्हे पाने की थी और
साथ ही साथ जीवन के तमाम बखेड़े थे !
जाने किस घड़ी में मैने तुम्हारे अक्स ,
अपने मन में उकेरे थे !
वो वादियां- हंसी की थी जो मिसाल कभी ,
देखा मैने -आज वहां मायुसियों के डेरे थे !
कुछ नक्श भी दिखे मुझे वहा ,
जो कुछ तेरे और कुछ मेरे थे !
कसक भी नही मलाल भी नही ,
बस सवाल ही बहुतेरे थे !
नज़र घुमाया जिधर भी ,
हर ओर सवालो के ही घेरे थे !
फ़ासला तो रहना ही था
क्योंकि तुम कभी ना मेरे थे !
वक़्त ने समझा दिया फ़िर
हम भी कभी ना तेरे थे !

 

क्यु करते हैं परेशान बेवजह किसी को ,
जाने क्यु दूसरों पर ही उंगली उठा देते हैं लोग !
जाने कब किसी को ज़मीन पर और
अचानक ही सर पर बिठा लेते हैं लोग !
खुद के गिरेबानो में भी थोड़ा झान्क लिया करो ,
दूध के धुले तो तुम भी नही !
कुछ तो तुमने भी छुपाया है पर्दो के पीछे ,
उतने खुले तो तुम भी नही !
गलतियां इन्सानो से ही होती हैं ,
तुम भी इस बात को मान लो !
अपमान कर के बार बार ,
ना किसी की जान लो !
किसी को उठा नही सकते
तो गिराना भी छोड़ दो !
हर रिश्ते के साथ साथ
इंसानियत का रिश्ता भी तोड़ लो


सपनो में खोना ,तो अब गुजरे ज़माने की बात हो गयी ,
अब तो हकीकत को ही हकीकत मे जीना है !
जीवन अब जहर ही सही ,
उसको तो हर हाल में पीना है !
फूलो की सेज तो कभी, थी भी नही ये ज़िन्दगी ,
हाँ ! कांटे थे लेकिन कम थे !
खुशियो की कतार थी पहले ,
बाद में थोड़े गम थे !
आहिस्ता आहिस्ता समय बदला
और समय के साथ हालात भी !
लोग बदले , मैं बदली
और बदले मेरे दिन रात भी !
ख्वहिशो की ख्वाहिश रही नही अब ,
बस जो मिला उसको ही जी लूं !
जीवन ये जहर ही सही ,
उसके बून्द बून्द को मैं पी लूं !

 

दिलासा मत दो मुझे कह कर कि -
तुम बस मेरे हो !
कहने की तो ज़रूरत ही क्या थी ,
जो तुम मेरे हो!
जो तुम मेरे होते -
तो समझते मेरे दिल की बात !
बातों के साथ साथ समझते
मेरे दिल के हर ज़ज़्बात !
सुना है दिलो के रिश्तो मे ,
शब्दों की ज़रूरत नही होती !
अब पता चल रहा मुझे
सुनी सुनायी बातों मे हकीकत नही होती !
या यु कहो फिर मैं ही ,
नासमझ निकली !
या यु कहो फ़िर मैं ही ,
बेअकल निकली!
जो समझ ना पाई तुमको
और तुम्हारे दिए हुए कर्ज़ को !
अपनी एह्सानो के तले दबा दिया है तुमने मुझे
और अपमानित किया अपने फ़र्ज़ को !
अफ़सोस है मुझे और जीवन भर रहेगा ,
तुम्हारे, मेरे रिश्ते को आज अच्छे से जाना !
अफ़सोस है मुझे और जीवन भर रहेगा
तुम मेरे ना थे कभी, क्यु तुमको मैने अपना माना!

 

बस कहते ही रहोगे या कोइ रास्ता भी निकालोगे ,
कि मुझे तुम पर ऐतबार नही है !
तो मैं भी बस कह्ती ही रहूंगी
कि मुझे तुम से प्यार नही है !
सब्र अब होता नही मुझसे ,
इस बांध को अब टूट जाने दो !
जहॉ हम मिले थे कभी ,
उस मोड़ को पीछे छुट जाने दो !
संग संग फ़ेरे लेना प्यार नही होता ,
कुछ कसमें भी निभानी होती हैं !
साथ चलना होता है- सुख में ,दुख में ,
तभी सुहानी जिंदगानी होती है !
वक़्त तो रुकेगा नही ,
चाहो तो मुझको रोक लो !
चली जा रही मैं अन्जाने रस्ते पर ,
पास आकर ज़रा मुझे टोक लो !


मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना
जो अब होगा ना दूबारा !
.........................
मैने पलको के घरोन्दों में ,
ख्वाब तेरा ही सजाया ,
खुशियां ही खुशियां हैं ,
जो तु है मेरा सरमाया ,
जन्नत सा है सुकुन यहाँ अब ,
जब से है तुमको मैने पाया !
............................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
.............................
तु माने या ना माने ,
तु कहॉ अब मुझसे जुदा है ,
तुम मिले हो जब से मुझसे ,
मेरा दिल ही गुमशुदा है ,
तु मुझ में है अब शामिल ,
तु मेरा रब है या खुदा है !
........................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखु,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
............................

 

कुछ दिन गुजरे
मिल कर आयी हूं
अपने माता पिता से !
जाने क्यु वो चलते
फ़िरते इन्सान भी
दिखने लगे हैं एक चिता से !
"समझ नही आता
वक़्त को बलवान कहूं
या महान!
इंसान जितना सोचता है
इस जीवन को
ये है नही उतना आसान!
राहे भी मिल जाती हैं
मन्ज़िले भी मिल जाती हैं
फिर भी रह जाती है एक कमी!
हसी से भरे पल मिलते हैं
हसने के मौकॆ भी मिलते हैं
फ़िर भी आ जाती है आँखों में नमी! "
सब कुछ तो पाना ना था उनको
बस छोटे छोटे ख्वाब ही थे
जो पूरे होकर भी पूरे ना हुए!
अपनो से जुड़ कर रहने
की थी ख्वाहिश
जो जुड़ कर भी जुड़े ना रहे!
"वक़्त महान तो नही
बलवान ही होता होगा
यही समझी अब तक !
इसको सुकुन मिलता नही
अपने आगे लोगों को
झुका ना ले जब तक! "
खुद्दारी खत्म होती नही
उन पर भी वक़्त सा ही
नशा है जुनुन है!
जैसा भी पल मिले
जैसे भी लोग मिलें
उसमे ही उनको सुकुन है!

 

मुझे मुझसे बेह्तर लोग जानते हैं
ऐसा मेरा नही लोगों का कहना है !
मना नही कर सकती उनकी बातों को
क्युन्कि मुझे तो उनके साथ ही रहना है !
मैं खुद को भी नही पह्चानती अब
क्युन्कि लोग ही अब मेरी पह्चान बनाते हैं!
मैं क्या हूं ,मैं कैसी हूं
इसके किस्से लोगों को सुनाते हैं!
सुनती हूं मैं सभी की बातों को
और कोशिश करती हूं समझने की !
और ना चाहते हुए भी
कोशिश करने लगती हूं वैसा बनने की !
पह्चान तो खो ही जाती है
खुद के अस्तित्व की !
बस एक ही बात नही हटती
वो है मेरे स्त्रित्व की !

 

मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्युं मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
गुमशुदा हैं, खुशिया मेरी ,
नज़रे करम, है ये तेरी ,
बैठ गयी हूं, थक हार के ,
अब करू क्या ,तु ही समझाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
जन्नत नही, मेरा जहॉ लौटा दे ,
मायुसियो की, घटा को हटा दे ,
खत्म हो जाये ,मायुसियो के घेरे ,
तु ही अबकी, ऐसी नूर बरसाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
आस ऐसी, है तुने जगाई ,
पास तेरे, मैं खींची चली आयी !
आरज़ू यही ,है अब मेरी ,
हाथ पकड़ ,तु रास्ता दिखाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्यु मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !

 

कुछ ख्वाब बुने हैं तुमने ,
कुछ ख्वाब बुने हैं हमने ,
ये जो सच हो जाये ,
सारा जहां मिल जाये ,
फिर बरसेन्गी इतनी खुशियां
खिल जायेगी मेरी दुनियां !
इक बात तो बता दो ,
उस रब का ज़रा पता दो ,
जो थामे है डॊर तेरी ,
और थामे है डॊर मेरी ,
मिल के मैं उनसे आउं,
अपने घर का पता बताउं ,
फिर आयेन्गी वो बहारे
खुशियो की वो फ़ुहारे !
दिल थाम लेना तुम भी ,
दिल थाम लून्गी मैं भी ,
कहीं पागल मैं हो ना जाउ ,
कहीं खुद में ही खो ना जाउ ,
जब देखुन्गी वो नज़ारे ,
जाने कब से उसे पुकारे !
.............................
कुछ ख्वाब बुने हैं तुमने
कुछ ख्वाब बुने हैं हमने
ये जो सच हो जाये
सारा जहां मिल जाये
फिर बरसेन्गी इतनी खुशियां
खिल जायेगी मेरी दुनियां

गुनाह

 

गुनाहो की जब गिनती शुरु हुइ ,
तो मेरे गुनाह भी कुछ कम ना निकले !
मान लिया मैने भी अपनी गलतियों को ,
औरो की तरह तो हम बेशर्म ना निकले !
मिटा दी सारी गलतफ़हमियो को दिल से ,
हटा दी नफ़रत की दीवार सभी !
शुरुआत की ,ज़िन्दगी की फिर से मैने ,
जैसे जनम लिया हो अभी अभी !
हौसले तो बुलन्द थे इतने कि
आन्धी भी आये तो हम ना हिलेन्गे !
कसम भी खा ली थी ऐसी कि
खुदगर्ज़ लोगों से अब हम ना मिलेंगे !
कुछ खुद ही सोचा और कुछ सबक भी ली ,
मैने अपने गुजरे हुए हालातो से !
फिर खुद को ही तसल्ली दी ,
मैने अपने ही हाथों से !
खुद को ही खुद के साथ खड़ा रखना ,
इंसान के लिये सबसे बडी बात है !
बहुत ही हिम्मत मिलती है इससे भी ,
अगर इंसान खुद ही खुद के साथ है !

एह्सास

 


एह्सास की जो ,बात थी वो ,
अब मुझमे नही !
नफ़रतो की ,भीड़ मे है ,
खो गयी कही !
जाने ,खुशियो को लग गयी है ,
किसकी नज़र !
जो, चली जा रही है ,
इधर से उधर !
ढूँढु ,एक चेहरा जो हो ,
दिल के करीब !
जिससे जुड़ु, और
फ़िर ,बदले नसीब !
शायद, यही हो सफ़र मेरा
और यही हो मुकाम !
शायद, मिले वो मुझे
या फिर हो जाउ नाकाम !
आओ, पास मेरे फिर
दिलाओ यकीन !
मुश्किले भी हो जाये
कुछ तो मुमकिन !

 

तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !
तु ही है साथी जन्मो का ,
तु हमसफ़र हर लम्हो का !
तु जुदा गर हो जाये ,
खुद से ही हम खो जाये !
तु ही मुझमे शामिल है ,
और तु ही मेरे काबिल है !
फिर चाहे जो कहे ये दुनिया ,
मैने तो दिल का सुन लिया !
तेरे लिये ही मैं जिउ ,
तुझमे ही मैं खोयी रहु !
फिर दिन हो या रात हो ,
बस तेरी और मेरी बात हो !
तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !

दिल मेरे

 

दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल ,के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
रेत पर ,जो घर बने ,
ढह जाते हैं !
बस निशा ,ही पीछे तो,
रह जाते हैं !
सोच सोच, के तु
कदम बढा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल के चल ज़रा !
ख्वाबो को अपने तु,
पर तो दे !
अरमानो को ,इक नया
घर तो दे !
बता मुझे ,
सोचे है क्या ,खड़ा खड़ा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल, के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !

 

किसे मैं अपना कहुं,
कौन है मेरे करीब बता !
तुझे प्यार गर है मुझसे ,
तो ये प्यार थोड़ा और जता !
कहने को तो कइ बाते हैं ,
सुनाने को तो कइ किस्से हैं !
पास आकर जाहिर कर ज़रा
कि वो बस तेरे ही हिस्से हैं !
ज़ज़्बातो की कमी नही मुझमे ,
ना ही एह्सासो की कमी है !
कोइ अपना सा शख्स मिलता नही ,
बस आंखों मे इसकी ही नमी है !

अपने

अपने तो अपने ना रहे ,
बेगाने तो बेगाने ही रहे !
ज़रा सी तक़दीर क्या डगमगाइ ,
सब मुझे आजमाने ही लगे !
किस बात का गुमान है ,
और इतना इतराते हो क्यु ?
जो कोइ गुनाह किया नही ,
फ़िर सबसे नज़रे कतराते हो क्यु ?
आंसूओ का सैलाब नज़र आता है ,
हर किसी की हसी पर !
जब शक़ की निगाह यु ही ,
बेवक़्त बेवजह चली जाती है किसी पर ,
सब्र कर ले एॆ दिल ज़रा तु भी ,
ना आँसूओ को अपना घर दे !
बसा ले दिल में अरमान यही कि
खुदा दिल को खुशियो से भर दे !

तुम्हारी यादें

 

जुदा तुम हो मुझसे ,
तुम्हारी यादें नहीं !
ऐसा कोइ भी पल नहीं ,
जिसमें तुम्हारी बातें नहीं !
वक़्त कॆ साथ यादें भी ,
पीछे छुट जाती हैं !
गया वक़्त तो आता नहीं ,
फिर यादें क्यु आ जाती हैं?
रात से सुबह, सुबह से शाम ,
फिर शाम से रात और रात से सुबह !
नाराज़ होती हूं दिल से ,
आखिरकार फिर कर लेती हूं सुलह !
चलो तुम ना सही ,
तुमहारी यादो का सहारा है !
तुम पर ना सही
तुम्हारी यादो पर हक़ हमारा है!

वक़्त

 


वक़्त ही के साथ चल रही हूं मैं तो ,
फिर क्यु रूकी रूकी सी लगती हूं !
कुछ ज्यादा सफ़र तो तय नही किया मैने ,
फिर क्यु थकी थकी सी लगती हूं !
ये कहा आ गयी हूं मैं ,
जीवन का कौन सा मोड़ है ?
वक़्त नही किसी के पास किसी के लिये भी ,
बस एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ है !
भीड़ ही भीड़ है हर ओर ,
लोगों के ही लगे मेले हैं !
जब कहना चाहो किसी को अपना ,
पता चलता है कितने सब अकेले हैं !
सबको तो पता है ,
अकेले आये और अकेले ही जाना है !
इसलिए तो गुज़ार लो साथ कुछ पल ,
क्या पता कितनी देर का साथ निभाना है !

शराफ़त

 


शराफ़त थी मेरी
जो तुझको निभाया !
ये बात भी तु
समझ ना पाया !
रुकावटॆ तो
हज़ार आइ !
हौसले भी तो
फिर मैने जुटाइ !
चाहती तो मैं भी
बहाने बनाती !
कुछ भी कह के
तुमसे पीछा छुड़ाती !
कायर तो तु भी ना था
जैसा तुने ही कहा था !
लेकिन अब तू वो ना रहा
जो कभी रहा था !
झूठे अफ़साने सुनाकर
तुने कर लिया किनारा !
बेवकूफ़ तो थी नही मैं
समझ लिया तेरा इशारा !
तुने राहे बदल ली
ढूँढ ली कोइ और मन्ज़िल !
उसकी तलाश में निकला तु
जो था शायद तेरे ही काबिल!

 


कितने दिन गुजरे ,
सुहाने सपने से मुलाक़ात नही की !
इक अरसा बीत गया ,
किसी अपने से बात नही की !
सुनती रही सबके दर्द
की कहानियों को !
मुझको मौका मिला ही नही
इसलिए किसी से साझा,अपनी जज़्बात नही की !
नफ़रत थोड़ी बहुत मुझमे भी है ,
मैने भी दुश्मनी दिखाई है किसी से !
एक बात है फिर भी अलग सी ,
किसी के साथ छुपकर मैने घात नही की !

वीरान साहिल

 

मैं तन्हाइयो की
महफ़िल हूं ,
हर किसी के
अश्को में शामिल हूं ,
वजह ना पूछॊ क्यु
मैं बस इसके ही काबिल हूं !
हसरत नही कोइ ,
कोइ उम्मीद नही ,
चाह नही कोइ ,
कोइ ज़िद नही ,
क्युन्कि मैं एक
टूटा हुआ दिल हूँ!
सुनसान हूं ,अकेला हूं ,
और नही कोइ हस्ती !
तूफ़ान लाख आये ,
जहाँ लगती नही कोइ कश्ती ,
मैं तो बस वो ही
वीरान साहिल हूं !

 

ज़िन्दगी गुज़री हमारी ,
रुठने मनाने में !
कुछ की गुज़री ,
अपनी किस्मत बनाने में !
जिनको पाना था ,
पा लिया आलिशान महल !
हम तो पड़े रहे ,
अपने टूटे से आशियाने में !
औरो के पास कमी ना रही ,
किसी बात की भी !
हम बस अफ़सोस ही
जमा करते रहे अपने खज़ाने में !
सुकुन पा लिया ,
बेफ़िक्र भी हो गये लोग !
हमने सारे पल गवाये ,
बस दूसरों को आजमाने में !

सुनो

 


सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
वो घंटॊ किसी से बातें करना ,
बातें करने पर भी दिल का ना भरना ,
किसी से ना कहना ,
खामोश उसकी आवाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
जैसे एक भवरे की गुनगुन ,
एक प्यारी सी धुन ,
कानो में चुपके से उसकी ही
वो मीठी सी साज़ गुंजने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
चेहरॆ पर हंसी लिये ,
आंखों के वो दो जलते दिये ,
ख्यालो में बसा बस ,
उसका वही अन्दाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !

अच्छा लगता है

 


सर्दी में जैसे ,
धूप में लेटना अच्छा लगता है !
वैसे ही तन्हाइयो में
तुम्हारी यादो को खुद से लपेटना अच्छा लगता है !
तुम्हें ही देखना हकीकत में
तुम्हें ही देखना ख्वाबो में
बस तुमको ही
अपनी निगाहो में समेटना अच्छा लगता है!
बारिश की रिमझिम फ़ुहार सी ,
सुकुन देती हैं तुम्हारा ख्याल !
तुम्हारे खयालो के सामने
घुटने मुझे टेकना अच्छा लगता है !
खोती हूं तुम्हारी बातों में ,
यादो की अतीत में जाकर!
और फिर आ जाते हो सामने तुम ,
उस गली मेरा तुमसे भेटना अच्छा लगता है !

मोड़

 

जाओगे जो कभी ,
तुम मुझे छॊड़ कर !
मिलुंगी मैं तुम्हें ,
सदा इसी मोड़ पर !
मैने ली है जो कसम ,
रहुं तेरी हर जनम !
तो निभाउंगी इसे ,
हर बंधन तोड़ कर !
तेरी बातों में जुनुन ,
तेरी यादो में सुकुन !
राहत सी है मुझे ,
तुझसे रिश्ता जोड़ कर !
जाओगे जो कभी ,
तुम मुझे छॊड़ कर !
मिलुंगी मैं तुम्हें ,
सदा इसी मोड़ पर !

अन्जाना सफ़र

 

अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !
ऐसा कोइ नही ,
जो मुझको पास ले !
अन्जाने लोग हैं ,
अन्जाने फ़ासले !
अन्जाना सा है डर ,
अन्जानॆ खुद से हम !
अन्जाने से लगे हैं ,
अब खुद के ही कदम !
अन्जानी सोच है ,
जाउ तो मैं किधर !
पहुँचुगी भी कहाँ मैं ,
अन्जाना ये सफ़र !
अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !

ज़िन्दगी

 


शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी !
सुबह के उजाले दिये ,
रात के अंधेरे को मिटा कर !
लोरी हवाओं का सुनाया ,
अपने बाहों में लिटा कर !
डाली तुने चादर ,
झिलमिलाते तारों की !
सौगात दी मुझे ,
फ़ूलो की, बहारों की !
खिलखिलाते से चेहरे
दिये संगत में मेरे !
ज़िन्दगी मैं तो
एह्सान मन्द हूं तेरे !
शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी!

हंसी

 


बेबाक सी हंसी लिये चेहरे पर
घुमा करते थे कभी!
क्या जन्नत मिल गयी है तुम्हें ,
मुझे पुछा करते थे सभी !
नज़र ही तो लग गयी है मुझे ,
वो हंसी कहीं हो गयी है गुम !
वापस फिर पूछते हैं वही ,
क्यु हो गये हो युं गुमसुम !
सुकुन नहीं है मुझे तो ,
सुकुन नहीं है उनको भी अब !
दूसरों से जलने वालॆ ,
सुकुन युं पाते हैं कब !
किसी की खुशी में खुश हों,
वो लोग मिलते हैं कम !
ढूँढने से मिलते नहीं अक्सर ,
किसी के दुख में,जिसकी आंखॆ हो नम !

मुखौटा

 


चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
तुम भी रहो अपनी असलियत के साथ ,
बिना किसी बनावट के !
हम भी रहे अपनेपन से ,
बिना किसी बाहरी सजावट के !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से चलो-फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
तुम्हें भी आजादी हो ,
अपने मन की सच्ची बात बताने की !
हमे भी कुछ आजादी हो ,
तुम्हें अपने जज़्बात सुनाने की !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
ऐसी कोइ बात ना हो जो ,
हमे रिश्ते निभाने को मजबूर करे !
शिकायत जो हो कोइ तो ,
चलो मिलकर दोनो दूर करे !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !

काश

 


कुछ भी नज़र क्यु ना आया तुझे ,
वो गलियॉ भी नहीं ,जो थीं कुछ खास सी !
जब तु भागी अपनी ज़िन्दगी से ,
थोड़ी परेशान और बदहवास सी !
कैसे भुला दिया तुने उन पलॊं को ,
गुज़ारे जो थे तुमने कुछ सुकुन से !
उन चेहरों को भी भुला दिया ,
जिनसे तुमको थोड़ी बहुत आस थी !
माना कि उलझनें बेशुमार थी ,
सबके साथ होती हैं वो तो !
कुछ तो और ही बात होगी ,
जो तुमको ये ज़िन्दगी ना रास थी !
जाते जाते कुछ बता तो जाती ,
क्या ज़ल्दी थी इतनी जाने की !
क्या तुझको ये भी याद ना रहा ,
कि मैं तुम्हारे कितने पास थी !
जाते जाते ये जता दिया तुमने ,
कुछ भी नहीं थी मैं तेरे लिये !
मैने समझा तुमको अपना हकीकत ,
लेकिन तुम्हारे लिये मैं बस "काश" थी !

कौन

 


तुम भी पूरे, हम भी पूरे ,
फिर यहाँ अधूरा कौन है ?
तुम भी अच्छॆ, हम भी अच्छॆ ,
तो फिर यहाँ बुरा कौन है ?
गलती ना तुमने की है ,
गलती ना हमने की है !
गलतियां फिर भी हुई,
जाने ये सब कर गया कौन है ?
तुम भी ना बदले ,
और हम भी ना बदले !
हम दोनों के बीच फिर ,
ये दूरिया कर गया कौन है ?
सन्नाटा है हर तरफ़ अब ,
गून्ज तो है वो भी सन्नाटॆ की !
क्या पता फिर सारे शोर ,
चुरा कर ले गया कौन है ?
सवाल हमारा नहीं कोई तुमसे ,
सवाल तुम्हारा नहीं कोई हमसे !
सवालो के ही ढेर फिर ,
दोनो के दिल में लगा गया कौन है ?

विरान दुनियां

 


तुम्हारे जाते ही दुनियां विरान हो जाती है ,
ना आया करो मेरे शहर कोइ !
अपनो से बि्छड़ने में बड़ा दर्द होता है ,
ना आया करो मेरे घर कोइ !
कुछ पल की खुशियां,
फिर सालों की उदासी ,
इससे तो फिर अच्छा है ,
ना लाओ ऐसी खुशियों की लहर कोइ!
सम्भलती हूं फिर बिखरती हूं ,
बिखरती हूं फिर सम्भलती हूं ,
रहम भी तो करो मुझ पर ,
ना बरसाओ ऐसा कहर कोइ !
तुम्हारे जाते ही दुनियां विरान हो जाती है ,
ना आया करो मेरे शहर कोइ !
अपनो से बि्छड़ने में बड़ा दर्द होता है ,
ना आया करो मेरे घर कोइ !

हद

 


चाहत की ,जो हद है ,
उस हद तक,
मैं ,तुम्हें चाहुन्गी ...
तुम मान्गो ,जो जॉ तो,
ये जॉ भी, तेरे नाम,
मैं, कर जाउन्गी ...
मुमकिन है, तेरा मिलना,
ना मिलो तो, तुझे खुदा से भी,
मैं, मान्ग लाउन्गी ...
मैं जो रुठू, कभी तुमसे,
इक आवाज़, बस देना,
मैं, चली आउन्गी ...
चाहत की ,जो हद है ,
उस हद तक,
मैं ,तुम्हें चाहुन्गी ...

दिल के दर्द





शब्दों के रूप में अक्सर ,
दिल के दर्द बयां होते हैं !
लेकिन उस दर्द को जो समझे ,
ऐसे लोग कहॉं होते हैं ?
पढ कर दो चार लाइनें ,
पूरी बात समझ जाते हैं !
ऐसे खुद को अक्ल्मन्द ,
समझने वाले तो जहां तहां होते हैं !
किसी की बातों को ,
हंसी में उड़ा दो !
फ़ितरत ही रहती कुछ लोगों की ,
हम तो परेशान ख्वाम्खां होते हैं !
जो कहा वो तो समझ में आये ,
जो ना कहा वो भी समझ गये !
ऐसे लोगों के तो,
औरो से अलग ही निशां होते हैं !

बावरा मन

 




मन बावरा....ये मेरा ,
जाने ....अब है किसे ढूँढता !
कुछ.... अब तो नही है सामने ,
सबसे ....रिश्ता तो कब का टूटा !
मन बावरा....ये मेरा ,
जाने ....अब है किसे ढूँढता !
बीते ...लम्हो में जा जा कर ,
जाने....किसको बुलाए पुकार कर !
जिन ...लम्हो से पीछा छुटा ,
उसे .... अब है क्यु ढूँढता !
मन बावरा....ये मेरा ,
जाने ....अब है किसे ढूँढता !
यादें... भुली मैं, धुन्धली हुइ ,
राते ...काली थी उजली हुइ !
पर ये ...सबसे है क्यु पुछता ,
वही ...पीछे छुटा जो रस्ता !
मन बावरा....ये मेरा ,
जाने ....अब है किसे ढूँढता !
मैं भी ...मन के बहाने ही सही ,
मन में ...जो भी था कहती रही !
हटाया... मन में जो भी धुन्ध् था ,
मन से ...मेरा भी कुछ था वास्ता !
मन बावरा....ये मेरा ,
जाने ....अब है किसे ढूँढता !

ख्याल



मैं जो ख्यालो में ,
खोयी खोयी सी ,
रहती हूं ,
ये तो बस ,
कसूर, है तेरा !
कभी जो ढूँढू,
तुझे तो ,
क्यु लगे ,
मुझे ऐसे ,
कि तु ,दूर है खड़ा !
क्यु लगे ,
तु मुझे ,
अपना ही ,
कुछ तो ,
नाता मुझसे
ज़रूर ,है तेरा !
लोगों का क्या है ,
वो तो
कहते हैं ,
कुछ नहीं ,
बस ये ,
फ़ितूर ,है मेरा !
तेरे हाथों की ,
छुअन जब ,
मेरे कांधे पर पड़ॆ तो ,
एह्सास ये हो,
कि कुछ ,वज़ूद है मेरा !
मैं जो ख्यालो में ,
खोयी खोयी सी ,
रहती हूं ,
ये तो बस ,
कसूर ,है तेरा !

बातें

 





बातें... वो पुरानी सी ,
यादें ...वो सुहानी सी ,
आंखों में... भर आती हैं ,
धड़कन भी ...ठहर जाती है,
लगॆ ऐसे ...जैसे कोइ ,
उस पल को... क़ैद कर कॆ ,
ला दे मेरे ...सामने और ,
कह दे मुझसे ...थाम लो तुम ,
खो ना जाये ...फिर ये तुमसे ,
बन ना जाये... फ़िर से ये ,
वही बातें .. फिर पुरानी ,
और यादें ...वो सुहानी....
बातें... वो पुरानी सी ,
यादें ...वो सुहानी सी ,
बरखा... की बहारो सी ,
खुशियो ...की फ़ुहारो सी ,
भिगाये ...जो मेरे मन को ,
भुल जाउ ...हर इक गम को ,
बस उसमे ...ही डूब जाउ ,
चाह कर भी ...निकल ना पाउ ,
फिर मिले ...ना मिले मुझे ये ,
जो हो जाये ...मुझसे ओझल ,
बन जाएन्गी ,फिर बातें ये पुरानी
और यादें ...फिर सुहानी !

ज़िन्दगी के मायने




पहले जो थे टूटे से बिखरे से हालात ,
वो अब सम्भल गए हैं !
मेरे लिये थे जो ज़िन्दगी के मायने ,
वो अब बदल गए हैं !
सुकुन मिल गया है ,
मिल गयी है थोडी़े राहत !
मिल गया है वो सब कुछ ,
कभी जिसकी थी मुझे चाहत !
तसल्ली हो गयी है ,
ज़िन्दगी पर भरोसा हो गया है !
पहले जो लगता था गमो का पहाड़ ,
वो अब थोड़ा सा हो गया है !
मिली मुझको मेरी मन्ज़िल ,
मिला मुझको वो घरोन्दा !
पाकर जिसे है खुश हो जाता ,
हर इक नादान परिन्दा !
पहले जो थे टूटे से बिखरे से हालात ,
वो अब सम्भल गए हैं !
मेरे लिये थे जो ज़िन्दगी के मायने ,
वो अब बदल गए हैं !

ख्वाहिश

 






तुम सोच लो चाहे जो भी ,
मेरी ख्वाहिश है कि
साथ तेरे ही रहुं!
तु मौज़ बने तो मौज़ बनु ,
तु दरिया तो मैं भी
संग संग तेरे ही बहु !
तेरी खुशी में झुम के नाचु ,
तेरे गम को भी अपना
समझ कर सहु !
बहुत सारी बातें हैं कहने को ,
फ़ुरसत निकालो जो थोड़ा तुम
तो मैं तुझसे कहू !

पहचान

 




मैं हैरान हूं ,
थोड़ी परेशान हूँ ,
हर जाने पहचाने से क्यों ,
थोड़ी थोड़ी अनजान हूँ !
भीड़ है पास मेरे ,
लोगों का शोर भी है ,
जाने लगता फिर भी क्यों ,
मैं एक विरान हूँ !
कोइ तो पास आये ,
कुछ तो फ़िक्र करे मेरी ,
बता दे मुझे भी ज़रा ,
मैं किसका अरमान हूँ !
सोचती हूँ कुछ नहीं ,
समझती हूँ कुछ नहीं ,
ढूँढॆ से भी मिलती नहीं ,
मैं किसकी पहचान हूँ !

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...