Saturday, 13 November 2021

तुम्हारी यादें

 

जुदा तुम हो मुझसे ,
तुम्हारी यादें नहीं !
ऐसा कोइ भी पल नहीं ,
जिसमें तुम्हारी बातें नहीं !
वक़्त कॆ साथ यादें भी ,
पीछे छुट जाती हैं !
गया वक़्त तो आता नहीं ,
फिर यादें क्यु आ जाती हैं?
रात से सुबह, सुबह से शाम ,
फिर शाम से रात और रात से सुबह !
नाराज़ होती हूं दिल से ,
आखिरकार फिर कर लेती हूं सुलह !
चलो तुम ना सही ,
तुमहारी यादो का सहारा है !
तुम पर ना सही
तुम्हारी यादो पर हक़ हमारा है!

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