ना आया करो मेरे शहर कोइ !
अपनो से बि्छड़ने में बड़ा दर्द होता है ,
ना आया करो मेरे घर कोइ !
कुछ पल की खुशियां,
फिर सालों की उदासी ,
इससे तो फिर अच्छा है ,
ना लाओ ऐसी खुशियों की लहर कोइ!
सम्भलती हूं फिर बिखरती हूं ,
बिखरती हूं फिर सम्भलती हूं ,
रहम भी तो करो मुझ पर ,
ना बरसाओ ऐसा कहर कोइ !
तुम्हारे जाते ही दुनियां विरान हो जाती है ,
ना आया करो मेरे शहर कोइ !
अपनो से बि्छड़ने में बड़ा दर्द होता है ,
ना आया करो मेरे घर कोइ !
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