Saturday, 13 November 2021



मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना
जो अब होगा ना दूबारा !
.........................
मैने पलको के घरोन्दों में ,
ख्वाब तेरा ही सजाया ,
खुशियां ही खुशियां हैं ,
जो तु है मेरा सरमाया ,
जन्नत सा है सुकुन यहाँ अब ,
जब से है तुमको मैने पाया !
............................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
.............................
तु माने या ना माने ,
तु कहॉ अब मुझसे जुदा है ,
तुम मिले हो जब से मुझसे ,
मेरा दिल ही गुमशुदा है ,
तु मुझ में है अब शामिल ,
तु मेरा रब है या खुदा है !
........................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखु,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
............................

No comments:

Post a Comment

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...