बस कहते ही रहोगे या कोइ रास्ता भी निकालोगे ,
कि मुझे तुम पर ऐतबार नही है !
तो मैं भी बस कह्ती ही रहूंगी
कि मुझे तुम से प्यार नही है !
सब्र अब होता नही मुझसे ,
इस बांध को अब टूट जाने दो !
जहॉ हम मिले थे कभी ,
उस मोड़ को पीछे छुट जाने दो !
संग संग फ़ेरे लेना प्यार नही होता ,
कुछ कसमें भी निभानी होती हैं !
साथ चलना होता है- सुख में ,दुख में ,
तभी सुहानी जिंदगानी होती है !
वक़्त तो रुकेगा नही ,
चाहो तो मुझको रोक लो !
चली जा रही मैं अन्जाने रस्ते पर ,
पास आकर ज़रा मुझे टोक लो !
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