क्यु करते हैं परेशान बेवजह किसी को ,
जाने क्यु दूसरों पर ही उंगली उठा देते हैं लोग !
जाने कब किसी को ज़मीन पर और
अचानक ही सर पर बिठा लेते हैं लोग !
खुद के गिरेबानो में भी थोड़ा झान्क लिया करो ,
दूध के धुले तो तुम भी नही !
कुछ तो तुमने भी छुपाया है पर्दो के पीछे ,
उतने खुले तो तुम भी नही !
गलतियां इन्सानो से ही होती हैं ,
तुम भी इस बात को मान लो !
अपमान कर के बार बार ,
ना किसी की जान लो !
किसी को उठा नही सकते
तो गिराना भी छोड़ दो !
हर रिश्ते के साथ साथ
इंसानियत का रिश्ता भी तोड़ लो
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