Saturday, 13 November 2021

ज़िन्दगी

 


शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी !
सुबह के उजाले दिये ,
रात के अंधेरे को मिटा कर !
लोरी हवाओं का सुनाया ,
अपने बाहों में लिटा कर !
डाली तुने चादर ,
झिलमिलाते तारों की !
सौगात दी मुझे ,
फ़ूलो की, बहारों की !
खिलखिलाते से चेहरे
दिये संगत में मेरे !
ज़िन्दगी मैं तो
एह्सान मन्द हूं तेरे !
शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी!

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