अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !
ऐसा कोइ नही ,
जो मुझको पास ले !
अन्जाने लोग हैं ,
अन्जाने फ़ासले !
अन्जाना सा है डर ,
अन्जानॆ खुद से हम !
अन्जाने से लगे हैं ,
अब खुद के ही कदम !
अन्जानी सोच है ,
जाउ तो मैं किधर !
पहुँचुगी भी कहाँ मैं ,
अन्जाना ये सफ़र !
अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !
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