धूप में लेटना अच्छा लगता है !
वैसे ही तन्हाइयो में
तुम्हारी यादो को खुद से लपेटना अच्छा लगता है !
तुम्हें ही देखना हकीकत में
तुम्हें ही देखना ख्वाबो में
बस तुमको ही
अपनी निगाहो में समेटना अच्छा लगता है!
बारिश की रिमझिम फ़ुहार सी ,
सुकुन देती हैं तुम्हारा ख्याल !
तुम्हारे खयालो के सामने
घुटने मुझे टेकना अच्छा लगता है !
खोती हूं तुम्हारी बातों में ,
यादो की अतीत में जाकर!
और फिर आ जाते हो सामने तुम ,
उस गली मेरा तुमसे भेटना अच्छा लगता है !
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