राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
वो घंटॊ किसी से बातें करना ,
बातें करने पर भी दिल का ना भरना ,
किसी से ना कहना ,
खामोश उसकी आवाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
जैसे एक भवरे की गुनगुन ,
एक प्यारी सी धुन ,
कानो में चुपके से उसकी ही
वो मीठी सी साज़ गुंजने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
चेहरॆ पर हंसी लिये ,
आंखों के वो दो जलते दिये ,
ख्यालो में बसा बस ,
उसका वही अन्दाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
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