Saturday, 13 November 2021

सुनो

 


सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
वो घंटॊ किसी से बातें करना ,
बातें करने पर भी दिल का ना भरना ,
किसी से ना कहना ,
खामोश उसकी आवाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
जैसे एक भवरे की गुनगुन ,
एक प्यारी सी धुन ,
कानो में चुपके से उसकी ही
वो मीठी सी साज़ गुंजने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
चेहरॆ पर हंसी लिये ,
आंखों के वो दो जलते दिये ,
ख्यालो में बसा बस ,
उसका वही अन्दाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !

No comments:

Post a Comment

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...