Saturday, 13 November 2021

 


कितने दिन गुजरे ,
सुहाने सपने से मुलाक़ात नही की !
इक अरसा बीत गया ,
किसी अपने से बात नही की !
सुनती रही सबके दर्द
की कहानियों को !
मुझको मौका मिला ही नही
इसलिए किसी से साझा,अपनी जज़्बात नही की !
नफ़रत थोड़ी बहुत मुझमे भी है ,
मैने भी दुश्मनी दिखाई है किसी से !
एक बात है फिर भी अलग सी ,
किसी के साथ छुपकर मैने घात नही की !

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