दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल ,के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
रेत पर ,जो घर बने ,
ढह जाते हैं !
बस निशा ,ही पीछे तो,
रह जाते हैं !
सोच सोच, के तु
कदम बढा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल के चल ज़रा !
ख्वाबो को अपने तु,
पर तो दे !
अरमानो को ,इक नया
घर तो दे !
बता मुझे ,
सोचे है क्या ,खड़ा खड़ा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल, के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
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