मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्युं मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
गुमशुदा हैं, खुशिया मेरी ,
नज़रे करम, है ये तेरी ,
बैठ गयी हूं, थक हार के ,
अब करू क्या ,तु ही समझाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
जन्नत नही, मेरा जहॉ लौटा दे ,
मायुसियो की, घटा को हटा दे ,
खत्म हो जाये ,मायुसियो के घेरे ,
तु ही अबकी, ऐसी नूर बरसाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
आस ऐसी, है तुने जगाई ,
पास तेरे, मैं खींची चली आयी !
आरज़ू यही ,है अब मेरी ,
हाथ पकड़ ,तु रास्ता दिखाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्यु मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
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