Poems are the best way to express your emotions.Relate your emotions with my poems.....
Saturday, 13 November 2021
बीती हुई बातें, बीते हुए पल
वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और
बहुत से गुजरे हुए कल
अक्सर याद आते हैं!
खो जाना दादी की कहानियों में
और खोये रहना बचपन की नादानियो में
वो दिन अपनी ही मनमानियों के
अक्सर याद आते हैं!
वो स्कूल जाना वो कालेज जाना
और कभी कभी ना जाने के भी बहाने बनाना
घर पर रह कर गुड़ियों से खेलना
अक्सर याद आते हैं !
रफ़्तार ज़िन्दगी की है वही की वही
मैं भी खड़ी रही यहीं की यहीं
असमंजस में रह गयी ज़िन्दगी भर मैं तो
जो भी हुआ अब तक वो गलत कि सही...
किसी से सुना था कहीं तो पढ़ा था
कर्मो का फ़ल मिलता है ज़रूर
कहीं जाने की ज़रूरत ही क्या
सब होता है यहीं के यहीं ...
रिश्ते सभी मोह के धागे
सभी बेबस हैं इस बात के आगे
उमर गुजर जाती है इसी सोच में
नाते किसी से तोड़े कि नहीं ...
वक़्त चलता रहा, साँसें भी चलती रहीं
यादों के गलियारे चल कर, मैं भी तो थकती नहीं !
उम्र से लम्बी तो नही कोई दास्तां
फिर खत्म क्यु नही होता यादों का कारवां !
अजनबी लोगों को राहों में देख कर ,सोचती हूं कभी कभी
युं ही तो दिखने लगे हैं आजकल अपने सभी !
आता नही समझ- किससे दूर रहू किसे पास रखू
किनको गैरो में रखू किनको खास रखू !
रिश्तो के जाल में उलझ कर फ़सते ही जाते हैं लोग
ये प्यार, ये नफ़रत, ये सब बस लगने लगते हैं रोग !
जीवन के साथ साथ ये रोग चलते हैं
इसी रोग की वजह से हम जीवन भर जलते हैं!
थोड़ा एकान्त चाहती हूं मैं ...
जिस घर में बचपन गुजारा ,
फिर से वहां रहना चाहती हूं मैं !
जिन रास्तो से कभी मैं गुजरा करती थी,
उन पर से ही-फिर से- गुजरना चाहती हूं मैं!
वो गुजरे हुए पल, जो आयेंगे नही वापस ,
अतीत में जाकर थोड़ी देर के लिए उन्हे जीना चाहती हूं मैं!
पुराने मकानो में जाकर ,कुछ पुरानी यादें ,
जीवन भर के लिए संजोना चाहती हूं मैं !
थोड़ी देर के लिए ही सही ,
बीते हुए कल में खोना चाहती हूं मैं!
बस...इसलिए ही थोडा सा एकान्त चाहती हूं मैं!
फ़ासले कभी दूर ना हो सके ,
जो दर्मियान तेरे मेरे थे !
कोशिश तो बहुत की लेकिन
जाने क्यु -तुम तक जाने के राह बहुत ही टेढे मेढे थे !
एक उलझन तुम्हे पाने की थी और
साथ ही साथ जीवन के तमाम बखेड़े थे !
जाने किस घड़ी में मैने तुम्हारे अक्स ,
अपने मन में उकेरे थे !
वो वादियां- हंसी की थी जो मिसाल कभी ,
देखा मैने -आज वहां मायुसियों के डेरे थे !
कुछ नक्श भी दिखे मुझे वहा ,
जो कुछ तेरे और कुछ मेरे थे !
कसक भी नही मलाल भी नही ,
बस सवाल ही बहुतेरे थे !
नज़र घुमाया जिधर भी ,
हर ओर सवालो के ही घेरे थे !
फ़ासला तो रहना ही था
क्योंकि तुम कभी ना मेरे थे !
वक़्त ने समझा दिया फ़िर
हम भी कभी ना तेरे थे !
क्यु करते हैं परेशान बेवजह किसी को ,
जाने क्यु दूसरों पर ही उंगली उठा देते हैं लोग !
जाने कब किसी को ज़मीन पर और
अचानक ही सर पर बिठा लेते हैं लोग !
खुद के गिरेबानो में भी थोड़ा झान्क लिया करो ,
दूध के धुले तो तुम भी नही !
कुछ तो तुमने भी छुपाया है पर्दो के पीछे ,
उतने खुले तो तुम भी नही !
गलतियां इन्सानो से ही होती हैं ,
तुम भी इस बात को मान लो !
अपमान कर के बार बार ,
ना किसी की जान लो !
किसी को उठा नही सकते
तो गिराना भी छोड़ दो !
हर रिश्ते के साथ साथ
इंसानियत का रिश्ता भी तोड़ लो
सपनो में खोना ,तो अब गुजरे ज़माने की बात हो गयी ,
अब तो हकीकत को ही हकीकत मे जीना है !
जीवन अब जहर ही सही ,
उसको तो हर हाल में पीना है !
फूलो की सेज तो कभी, थी भी नही ये ज़िन्दगी ,
हाँ ! कांटे थे लेकिन कम थे !
खुशियो की कतार थी पहले ,
बाद में थोड़े गम थे !
आहिस्ता आहिस्ता समय बदला
और समय के साथ हालात भी !
लोग बदले , मैं बदली
और बदले मेरे दिन रात भी !
ख्वहिशो की ख्वाहिश रही नही अब ,
बस जो मिला उसको ही जी लूं !
जीवन ये जहर ही सही ,
उसके बून्द बून्द को मैं पी लूं !
दिलासा मत दो मुझे कह कर कि -
तुम बस मेरे हो !
कहने की तो ज़रूरत ही क्या थी ,
जो तुम मेरे हो!
जो तुम मेरे होते -
तो समझते मेरे दिल की बात !
बातों के साथ साथ समझते
मेरे दिल के हर ज़ज़्बात !
सुना है दिलो के रिश्तो मे ,
शब्दों की ज़रूरत नही होती !
अब पता चल रहा मुझे
सुनी सुनायी बातों मे हकीकत नही होती !
या यु कहो फिर मैं ही ,
नासमझ निकली !
या यु कहो फ़िर मैं ही ,
बेअकल निकली!
जो समझ ना पाई तुमको
और तुम्हारे दिए हुए कर्ज़ को !
अपनी एह्सानो के तले दबा दिया है तुमने मुझे
और अपमानित किया अपने फ़र्ज़ को !
अफ़सोस है मुझे और जीवन भर रहेगा ,
तुम्हारे, मेरे रिश्ते को आज अच्छे से जाना !
अफ़सोस है मुझे और जीवन भर रहेगा
तुम मेरे ना थे कभी, क्यु तुमको मैने अपना माना!
बस कहते ही रहोगे या कोइ रास्ता भी निकालोगे ,
कि मुझे तुम पर ऐतबार नही है !
तो मैं भी बस कह्ती ही रहूंगी
कि मुझे तुम से प्यार नही है !
सब्र अब होता नही मुझसे ,
इस बांध को अब टूट जाने दो !
जहॉ हम मिले थे कभी ,
उस मोड़ को पीछे छुट जाने दो !
संग संग फ़ेरे लेना प्यार नही होता ,
कुछ कसमें भी निभानी होती हैं !
साथ चलना होता है- सुख में ,दुख में ,
तभी सुहानी जिंदगानी होती है !
वक़्त तो रुकेगा नही ,
चाहो तो मुझको रोक लो !
चली जा रही मैं अन्जाने रस्ते पर ,
पास आकर ज़रा मुझे टोक लो !
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना
जो अब होगा ना दूबारा !
.........................
मैने पलको के घरोन्दों में ,
ख्वाब तेरा ही सजाया ,
खुशियां ही खुशियां हैं ,
जो तु है मेरा सरमाया ,
जन्नत सा है सुकुन यहाँ अब ,
जब से है तुमको मैने पाया !
............................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखुं ,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
.............................
तु माने या ना माने ,
तु कहॉ अब मुझसे जुदा है ,
तुम मिले हो जब से मुझसे ,
मेरा दिल ही गुमशुदा है ,
तु मुझ में है अब शामिल ,
तु मेरा रब है या खुदा है !
........................
मेरे दिल की सरजमीं पर ,
तेरे चेहरे को उतारा ,
अब उस चेहरे में ही देखु,
मैं हर एक ही नज़ारा ,
क्युन्कि चाहत है तुमसे इतना ,
जो अब होगा ना दूबारा !
............................
कुछ दिन गुजरे
मिल कर आयी हूं
अपने माता पिता से !
जाने क्यु वो चलते
फ़िरते इन्सान भी
दिखने लगे हैं एक चिता से !
"समझ नही आता
वक़्त को बलवान कहूं
या महान!
इंसान जितना सोचता है
इस जीवन को
ये है नही उतना आसान!
राहे भी मिल जाती हैं
मन्ज़िले भी मिल जाती हैं
फिर भी रह जाती है एक कमी!
हसी से भरे पल मिलते हैं
हसने के मौकॆ भी मिलते हैं
फ़िर भी आ जाती है आँखों में नमी! "
सब कुछ तो पाना ना था उनको
बस छोटे छोटे ख्वाब ही थे
जो पूरे होकर भी पूरे ना हुए!
अपनो से जुड़ कर रहने
की थी ख्वाहिश
जो जुड़ कर भी जुड़े ना रहे!
"वक़्त महान तो नही
बलवान ही होता होगा
यही समझी अब तक !
इसको सुकुन मिलता नही
अपने आगे लोगों को
झुका ना ले जब तक! "
खुद्दारी खत्म होती नही
उन पर भी वक़्त सा ही
नशा है जुनुन है!
जैसा भी पल मिले
जैसे भी लोग मिलें
उसमे ही उनको सुकुन है!
मुझे मुझसे बेह्तर लोग जानते हैं
ऐसा मेरा नही लोगों का कहना है !
मना नही कर सकती उनकी बातों को
क्युन्कि मुझे तो उनके साथ ही रहना है !
मैं खुद को भी नही पह्चानती अब
क्युन्कि लोग ही अब मेरी पह्चान बनाते हैं!
मैं क्या हूं ,मैं कैसी हूं
इसके किस्से लोगों को सुनाते हैं!
सुनती हूं मैं सभी की बातों को
और कोशिश करती हूं समझने की !
और ना चाहते हुए भी
कोशिश करने लगती हूं वैसा बनने की !
पह्चान तो खो ही जाती है
खुद के अस्तित्व की !
बस एक ही बात नही हटती
वो है मेरे स्त्रित्व की !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्युं मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
गुमशुदा हैं, खुशिया मेरी ,
नज़रे करम, है ये तेरी ,
बैठ गयी हूं, थक हार के ,
अब करू क्या ,तु ही समझाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
जन्नत नही, मेरा जहॉ लौटा दे ,
मायुसियो की, घटा को हटा दे ,
खत्म हो जाये ,मायुसियो के घेरे ,
तु ही अबकी, ऐसी नूर बरसाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
आस ऐसी, है तुने जगाई ,
पास तेरे, मैं खींची चली आयी !
आरज़ू यही ,है अब मेरी ,
हाथ पकड़ ,तु रास्ता दिखाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
क्यु मुश्किल ये दी ,
क्यु राहे वो दी ,
कि जायेन्गी कहा ,
ना कोइ ठिकाना !
मालिक मेरे, ज़रा तु बताना ,
चुप रह के, ना मुझको सताना !
कुछ ख्वाब बुने हैं तुमने ,
कुछ ख्वाब बुने हैं हमने ,
ये जो सच हो जाये ,
सारा जहां मिल जाये ,
फिर बरसेन्गी इतनी खुशियां
खिल जायेगी मेरी दुनियां !
इक बात तो बता दो ,
उस रब का ज़रा पता दो ,
जो थामे है डॊर तेरी ,
और थामे है डॊर मेरी ,
मिल के मैं उनसे आउं,
अपने घर का पता बताउं ,
फिर आयेन्गी वो बहारे
खुशियो की वो फ़ुहारे !
दिल थाम लेना तुम भी ,
दिल थाम लून्गी मैं भी ,
कहीं पागल मैं हो ना जाउ ,
कहीं खुद में ही खो ना जाउ ,
जब देखुन्गी वो नज़ारे ,
जाने कब से उसे पुकारे !
.............................
कुछ ख्वाब बुने हैं तुमने
कुछ ख्वाब बुने हैं हमने
ये जो सच हो जाये
सारा जहां मिल जाये
फिर बरसेन्गी इतनी खुशियां
खिल जायेगी मेरी दुनियां
गुनाह
गुनाहो की जब गिनती शुरु हुइ ,
तो मेरे गुनाह भी कुछ कम ना निकले !
मान लिया मैने भी अपनी गलतियों को ,
औरो की तरह तो हम बेशर्म ना निकले !
मिटा दी सारी गलतफ़हमियो को दिल से ,
हटा दी नफ़रत की दीवार सभी !
शुरुआत की ,ज़िन्दगी की फिर से मैने ,
जैसे जनम लिया हो अभी अभी !
हौसले तो बुलन्द थे इतने कि
आन्धी भी आये तो हम ना हिलेन्गे !
कसम भी खा ली थी ऐसी कि
खुदगर्ज़ लोगों से अब हम ना मिलेंगे !
कुछ खुद ही सोचा और कुछ सबक भी ली ,
मैने अपने गुजरे हुए हालातो से !
फिर खुद को ही तसल्ली दी ,
मैने अपने ही हाथों से !
खुद को ही खुद के साथ खड़ा रखना ,
इंसान के लिये सबसे बडी बात है !
बहुत ही हिम्मत मिलती है इससे भी ,
अगर इंसान खुद ही खुद के साथ है !
एह्सास
अब मुझमे नही !
नफ़रतो की ,भीड़ मे है ,
खो गयी कही !
जाने ,खुशियो को लग गयी है ,
किसकी नज़र !
जो, चली जा रही है ,
इधर से उधर !
ढूँढु ,एक चेहरा जो हो ,
दिल के करीब !
जिससे जुड़ु, और
फ़िर ,बदले नसीब !
शायद, यही हो सफ़र मेरा
और यही हो मुकाम !
शायद, मिले वो मुझे
या फिर हो जाउ नाकाम !
आओ, पास मेरे फिर
दिलाओ यकीन !
मुश्किले भी हो जाये
कुछ तो मुमकिन !
तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !
तु ही है साथी जन्मो का ,
तु हमसफ़र हर लम्हो का !
तु जुदा गर हो जाये ,
खुद से ही हम खो जाये !
तु ही मुझमे शामिल है ,
और तु ही मेरे काबिल है !
फिर चाहे जो कहे ये दुनिया ,
मैने तो दिल का सुन लिया !
तेरे लिये ही मैं जिउ ,
तुझमे ही मैं खोयी रहु !
फिर दिन हो या रात हो ,
बस तेरी और मेरी बात हो !
तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !
दिल मेरे
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल ,के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
रेत पर ,जो घर बने ,
ढह जाते हैं !
बस निशा ,ही पीछे तो,
रह जाते हैं !
सोच सोच, के तु
कदम बढा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल के चल ज़रा !
ख्वाबो को अपने तु,
पर तो दे !
अरमानो को ,इक नया
घर तो दे !
बता मुझे ,
सोचे है क्या ,खड़ा खड़ा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल, के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
किसे मैं अपना कहुं,
कौन है मेरे करीब बता !
तुझे प्यार गर है मुझसे ,
तो ये प्यार थोड़ा और जता !
कहने को तो कइ बाते हैं ,
सुनाने को तो कइ किस्से हैं !
पास आकर जाहिर कर ज़रा
कि वो बस तेरे ही हिस्से हैं !
ज़ज़्बातो की कमी नही मुझमे ,
ना ही एह्सासो की कमी है !
कोइ अपना सा शख्स मिलता नही ,
बस आंखों मे इसकी ही नमी है !
अपने
अपने तो अपने ना रहे ,
बेगाने तो बेगाने ही रहे !
ज़रा सी तक़दीर क्या डगमगाइ ,
सब मुझे आजमाने ही लगे !
किस बात का गुमान है ,
और इतना इतराते हो क्यु ?
जो कोइ गुनाह किया नही ,
फ़िर सबसे नज़रे कतराते हो क्यु ?
आंसूओ का सैलाब नज़र आता है ,
हर किसी की हसी पर !
जब शक़ की निगाह यु ही ,
बेवक़्त बेवजह चली जाती है किसी पर ,
सब्र कर ले एॆ दिल ज़रा तु भी ,
ना आँसूओ को अपना घर दे !
बसा ले दिल में अरमान यही कि
खुदा दिल को खुशियो से भर दे !
बेगाने तो बेगाने ही रहे !
ज़रा सी तक़दीर क्या डगमगाइ ,
सब मुझे आजमाने ही लगे !
किस बात का गुमान है ,
और इतना इतराते हो क्यु ?
जो कोइ गुनाह किया नही ,
फ़िर सबसे नज़रे कतराते हो क्यु ?
आंसूओ का सैलाब नज़र आता है ,
हर किसी की हसी पर !
जब शक़ की निगाह यु ही ,
बेवक़्त बेवजह चली जाती है किसी पर ,
सब्र कर ले एॆ दिल ज़रा तु भी ,
ना आँसूओ को अपना घर दे !
बसा ले दिल में अरमान यही कि
खुदा दिल को खुशियो से भर दे !
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