Saturday, 13 November 2021

सुनो

 


सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
वो घंटॊ किसी से बातें करना ,
बातें करने पर भी दिल का ना भरना ,
किसी से ना कहना ,
खामोश उसकी आवाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
जैसे एक भवरे की गुनगुन ,
एक प्यारी सी धुन ,
कानो में चुपके से उसकी ही
वो मीठी सी साज़ गुंजने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !
चेहरॆ पर हंसी लिये ,
आंखों के वो दो जलते दिये ,
ख्यालो में बसा बस ,
उसका वही अन्दाज़ रहने दो !
सुनो,
राज़ को राज़ रहने दो ,
कल को कल और
आज को आज रहने दो !

अच्छा लगता है

 


सर्दी में जैसे ,
धूप में लेटना अच्छा लगता है !
वैसे ही तन्हाइयो में
तुम्हारी यादो को खुद से लपेटना अच्छा लगता है !
तुम्हें ही देखना हकीकत में
तुम्हें ही देखना ख्वाबो में
बस तुमको ही
अपनी निगाहो में समेटना अच्छा लगता है!
बारिश की रिमझिम फ़ुहार सी ,
सुकुन देती हैं तुम्हारा ख्याल !
तुम्हारे खयालो के सामने
घुटने मुझे टेकना अच्छा लगता है !
खोती हूं तुम्हारी बातों में ,
यादो की अतीत में जाकर!
और फिर आ जाते हो सामने तुम ,
उस गली मेरा तुमसे भेटना अच्छा लगता है !

मोड़

 

जाओगे जो कभी ,
तुम मुझे छॊड़ कर !
मिलुंगी मैं तुम्हें ,
सदा इसी मोड़ पर !
मैने ली है जो कसम ,
रहुं तेरी हर जनम !
तो निभाउंगी इसे ,
हर बंधन तोड़ कर !
तेरी बातों में जुनुन ,
तेरी यादो में सुकुन !
राहत सी है मुझे ,
तुझसे रिश्ता जोड़ कर !
जाओगे जो कभी ,
तुम मुझे छॊड़ कर !
मिलुंगी मैं तुम्हें ,
सदा इसी मोड़ पर !

अन्जाना सफ़र

 

अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !
ऐसा कोइ नही ,
जो मुझको पास ले !
अन्जाने लोग हैं ,
अन्जाने फ़ासले !
अन्जाना सा है डर ,
अन्जानॆ खुद से हम !
अन्जाने से लगे हैं ,
अब खुद के ही कदम !
अन्जानी सोच है ,
जाउ तो मैं किधर !
पहुँचुगी भी कहाँ मैं ,
अन्जाना ये सफ़र !
अन्जानी सी गली ,
अन्जाने रास्ते !
मैं ठहरु भी यहाँ ,
तो किसके वास्ते !

ज़िन्दगी

 


शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी !
सुबह के उजाले दिये ,
रात के अंधेरे को मिटा कर !
लोरी हवाओं का सुनाया ,
अपने बाहों में लिटा कर !
डाली तुने चादर ,
झिलमिलाते तारों की !
सौगात दी मुझे ,
फ़ूलो की, बहारों की !
खिलखिलाते से चेहरे
दिये संगत में मेरे !
ज़िन्दगी मैं तो
एह्सान मन्द हूं तेरे !
शुक्र गुज़ार हूं मैं ,
ज़िन्दगी तेरी !
खुशियों से भर दी ,
तुने दामन मेरी!

हंसी

 


बेबाक सी हंसी लिये चेहरे पर
घुमा करते थे कभी!
क्या जन्नत मिल गयी है तुम्हें ,
मुझे पुछा करते थे सभी !
नज़र ही तो लग गयी है मुझे ,
वो हंसी कहीं हो गयी है गुम !
वापस फिर पूछते हैं वही ,
क्यु हो गये हो युं गुमसुम !
सुकुन नहीं है मुझे तो ,
सुकुन नहीं है उनको भी अब !
दूसरों से जलने वालॆ ,
सुकुन युं पाते हैं कब !
किसी की खुशी में खुश हों,
वो लोग मिलते हैं कम !
ढूँढने से मिलते नहीं अक्सर ,
किसी के दुख में,जिसकी आंखॆ हो नम !

मुखौटा

 


चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
तुम भी रहो अपनी असलियत के साथ ,
बिना किसी बनावट के !
हम भी रहे अपनेपन से ,
बिना किसी बाहरी सजावट के !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से चलो-फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
तुम्हें भी आजादी हो ,
अपने मन की सच्ची बात बताने की !
हमे भी कुछ आजादी हो ,
तुम्हें अपने जज़्बात सुनाने की !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !
ऐसी कोइ बात ना हो जो ,
हमे रिश्ते निभाने को मजबूर करे !
शिकायत जो हो कोइ तो ,
चलो मिलकर दोनो दूर करे !
चलो आज हम तुम मिलकर ,
एक समझौता करते हैं !
उतारकर चेहरे से-चलो फ़ेक आए ,
दुनियां वाले जिसे झूठ का मुखौटा कहते हैं !

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...