Saturday, 13 November 2021

गुनाह

 

गुनाहो की जब गिनती शुरु हुइ ,
तो मेरे गुनाह भी कुछ कम ना निकले !
मान लिया मैने भी अपनी गलतियों को ,
औरो की तरह तो हम बेशर्म ना निकले !
मिटा दी सारी गलतफ़हमियो को दिल से ,
हटा दी नफ़रत की दीवार सभी !
शुरुआत की ,ज़िन्दगी की फिर से मैने ,
जैसे जनम लिया हो अभी अभी !
हौसले तो बुलन्द थे इतने कि
आन्धी भी आये तो हम ना हिलेन्गे !
कसम भी खा ली थी ऐसी कि
खुदगर्ज़ लोगों से अब हम ना मिलेंगे !
कुछ खुद ही सोचा और कुछ सबक भी ली ,
मैने अपने गुजरे हुए हालातो से !
फिर खुद को ही तसल्ली दी ,
मैने अपने ही हाथों से !
खुद को ही खुद के साथ खड़ा रखना ,
इंसान के लिये सबसे बडी बात है !
बहुत ही हिम्मत मिलती है इससे भी ,
अगर इंसान खुद ही खुद के साथ है !

एह्सास

 


एह्सास की जो ,बात थी वो ,
अब मुझमे नही !
नफ़रतो की ,भीड़ मे है ,
खो गयी कही !
जाने ,खुशियो को लग गयी है ,
किसकी नज़र !
जो, चली जा रही है ,
इधर से उधर !
ढूँढु ,एक चेहरा जो हो ,
दिल के करीब !
जिससे जुड़ु, और
फ़िर ,बदले नसीब !
शायद, यही हो सफ़र मेरा
और यही हो मुकाम !
शायद, मिले वो मुझे
या फिर हो जाउ नाकाम !
आओ, पास मेरे फिर
दिलाओ यकीन !
मुश्किले भी हो जाये
कुछ तो मुमकिन !

 

तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !
तु ही है साथी जन्मो का ,
तु हमसफ़र हर लम्हो का !
तु जुदा गर हो जाये ,
खुद से ही हम खो जाये !
तु ही मुझमे शामिल है ,
और तु ही मेरे काबिल है !
फिर चाहे जो कहे ये दुनिया ,
मैने तो दिल का सुन लिया !
तेरे लिये ही मैं जिउ ,
तुझमे ही मैं खोयी रहु !
फिर दिन हो या रात हो ,
बस तेरी और मेरी बात हो !
तु ख्वाब है इन आँखों का ,
तु राग है इन साँसॊ का !
इक बार तुझे जो पा लिया ,
सारा जहां जैसे पा लिया !

दिल मेरे

 

दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल ,के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !
रेत पर ,जो घर बने ,
ढह जाते हैं !
बस निशा ,ही पीछे तो,
रह जाते हैं !
सोच सोच, के तु
कदम बढा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल के चल ज़रा !
ख्वाबो को अपने तु,
पर तो दे !
अरमानो को ,इक नया
घर तो दे !
बता मुझे ,
सोचे है क्या ,खड़ा खड़ा !
दिल मेरे ,
सम्भल सम्भल, के चल ज़रा !
टूटे ना तु ,
ये दुनियां है, ज़ालिम बड़ा !

 

किसे मैं अपना कहुं,
कौन है मेरे करीब बता !
तुझे प्यार गर है मुझसे ,
तो ये प्यार थोड़ा और जता !
कहने को तो कइ बाते हैं ,
सुनाने को तो कइ किस्से हैं !
पास आकर जाहिर कर ज़रा
कि वो बस तेरे ही हिस्से हैं !
ज़ज़्बातो की कमी नही मुझमे ,
ना ही एह्सासो की कमी है !
कोइ अपना सा शख्स मिलता नही ,
बस आंखों मे इसकी ही नमी है !

अपने

अपने तो अपने ना रहे ,
बेगाने तो बेगाने ही रहे !
ज़रा सी तक़दीर क्या डगमगाइ ,
सब मुझे आजमाने ही लगे !
किस बात का गुमान है ,
और इतना इतराते हो क्यु ?
जो कोइ गुनाह किया नही ,
फ़िर सबसे नज़रे कतराते हो क्यु ?
आंसूओ का सैलाब नज़र आता है ,
हर किसी की हसी पर !
जब शक़ की निगाह यु ही ,
बेवक़्त बेवजह चली जाती है किसी पर ,
सब्र कर ले एॆ दिल ज़रा तु भी ,
ना आँसूओ को अपना घर दे !
बसा ले दिल में अरमान यही कि
खुदा दिल को खुशियो से भर दे !

तुम्हारी यादें

 

जुदा तुम हो मुझसे ,
तुम्हारी यादें नहीं !
ऐसा कोइ भी पल नहीं ,
जिसमें तुम्हारी बातें नहीं !
वक़्त कॆ साथ यादें भी ,
पीछे छुट जाती हैं !
गया वक़्त तो आता नहीं ,
फिर यादें क्यु आ जाती हैं?
रात से सुबह, सुबह से शाम ,
फिर शाम से रात और रात से सुबह !
नाराज़ होती हूं दिल से ,
आखिरकार फिर कर लेती हूं सुलह !
चलो तुम ना सही ,
तुमहारी यादो का सहारा है !
तुम पर ना सही
तुम्हारी यादो पर हक़ हमारा है!

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...