अपने पिता को मैने,मेरी जिद के आगे,सर झुकाते देख़ा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!
असफ़ल जो हुई कभी तो,ऊम्मीदो से,दिलासा दिलाते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!
मुश्किल हालात में भी ऊन्हे,अक्सर मुस्कुराते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!
अपने बच्चों की खुशी के लिए,सारी ऊमर बिताते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!
अपने पिता को मैने,अपना फ़र्ज़ अ ज़िन्दगी का कर्ज़ चुकाते देखा है
हाँ,अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!
So true. You gave words to feelings.
ReplyDeleteThank you :)
DeleteReally true..
DeleteReally true..
Delete