Sunday, 4 February 2018

उदासी


रिश्तो का क्या है,अब वो कभी भी टूट जाते हैं
अपने सभी बस,बीच रास्ते में ही छूट जाते हैं!

आ गया है जाने कौन सा समय कि
गैर तो गैर, अपने भी लूट जाते हैं!

भरोसो की तो बात ना पूछॊ यहॉ,
वो भी तो पल भर में ही टूट जाते हैं!

मना लो चाहे जीतना भी खुशियो के पल को
बिना कुछ कहे ही ,वो भी रूठ जाते हैं!

जाने नज़र लग गयी है किसकी
जिससे अच्छे खासे नसीब भी फूट जाते हैं!




No comments:

Post a Comment

बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...