Monday, 5 February 2018

बदलते लोग

दुनिया बदल गयी है, या ईन्सान बदल गया
जाने वो कौन था..जो दुनिया को दोष देकर निकल गया !

जिधर देखो,अपनी ही  तारिफ़ो के पूल बांधते लोग 
एक तु ही अच्छा है, गर ईन  सब से सम्भल गया !

एक दूसरे से  बढ़ने की होड में  
इंसान अपनी ईन्सानियत को ही निगल गया !

सच का साथ देने वाले अब रह गये हैं कम ही
जिसे देखो वो ही सुनहरी झूठ पर फ़िसल गया !

खुद चाहे कितना भी ताका झाँकी कर लें लोग
पसन्द नहीं ,दूसरे ने ऊनके जीवन में जो दखल दिया!








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