Saturday, 3 February 2018

एक पिता


अपने पिता को मैने,मेरी जिद के आगे,सर झुकाते देख़ा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

असफ़ल जो हुई कभी तो,ऊम्मीदो से,दिलासा दिलाते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

मुश्किल हालात में भी  ऊन्हे,अक्सर मुस्कुराते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

अपने बच्चों की खुशी के लिए,सारी ऊमर बिताते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

अपने पिता को मैने,अपना फ़र्ज़ अ ज़िन्दगी का कर्ज़ चुकाते देखा है
हाँ,अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!


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