Monday, 5 February 2018

बदलते लोग

दुनिया बदल गयी है, या ईन्सान बदल गया
जाने वो कौन था..जो दुनिया को दोष देकर निकल गया !

जिधर देखो,अपनी ही  तारिफ़ो के पूल बांधते लोग 
एक तु ही अच्छा है, गर ईन  सब से सम्भल गया !

एक दूसरे से  बढ़ने की होड में  
इंसान अपनी ईन्सानियत को ही निगल गया !

सच का साथ देने वाले अब रह गये हैं कम ही
जिसे देखो वो ही सुनहरी झूठ पर फ़िसल गया !

खुद चाहे कितना भी ताका झाँकी कर लें लोग
पसन्द नहीं ,दूसरे ने ऊनके जीवन में जो दखल दिया!








Sunday, 4 February 2018

उदासी


रिश्तो का क्या है,अब वो कभी भी टूट जाते हैं
अपने सभी बस,बीच रास्ते में ही छूट जाते हैं!

आ गया है जाने कौन सा समय कि
गैर तो गैर, अपने भी लूट जाते हैं!

भरोसो की तो बात ना पूछॊ यहॉ,
वो भी तो पल भर में ही टूट जाते हैं!

मना लो चाहे जीतना भी खुशियो के पल को
बिना कुछ कहे ही ,वो भी रूठ जाते हैं!

जाने नज़र लग गयी है किसकी
जिससे अच्छे खासे नसीब भी फूट जाते हैं!




Saturday, 3 February 2018

एक पिता


अपने पिता को मैने,मेरी जिद के आगे,सर झुकाते देख़ा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

असफ़ल जो हुई कभी तो,ऊम्मीदो से,दिलासा दिलाते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

मुश्किल हालात में भी  ऊन्हे,अक्सर मुस्कुराते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

अपने बच्चों की खुशी के लिए,सारी ऊमर बिताते देखा है
अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!

अपने पिता को मैने,अपना फ़र्ज़ अ ज़िन्दगी का कर्ज़ चुकाते देखा है
हाँ,अपनी बेबस ी को बहुत ही असानी से छुपाते देखा है!


बीती हुई बातें, बीते हुए पल वो धुन्ध्ल्ली सी यादें और बहुत से गुजरे हुए कल अक्सर याद आते हैं! खो जाना दादी की कहानियों में और खोये रहना बचप...