दुनिया बदल गयी है, या ईन्सान बदल गया
जाने वो कौन था..जो दुनिया को दोष देकर निकल गया !
जिधर देखो,अपनी ही तारिफ़ो के पूल बांधते लोग
एक तु ही अच्छा है, गर ईन सब से सम्भल गया !
एक दूसरे से बढ़ने की होड में
इंसान अपनी ईन्सानियत को ही निगल गया !
सच का साथ देने वाले अब रह गये हैं कम ही
जिसे देखो वो ही सुनहरी झूठ पर फ़िसल गया !
खुद चाहे कितना भी ताका झाँकी कर लें लोग
पसन्द नहीं ,दूसरे ने ऊनके जीवन में जो दखल दिया!
सच का साथ देने वाले अब रह गये हैं कम ही
जिसे देखो वो ही सुनहरी झूठ पर फ़िसल गया !
खुद चाहे कितना भी ताका झाँकी कर लें लोग
पसन्द नहीं ,दूसरे ने ऊनके जीवन में जो दखल दिया!